आप कु हामेसा एक बात
धयान रखना की चिंता कु बार बार दूर करनेकेलिये कोसिस नहीं करना चाइये कुयन की वो
चिंता बार बार आप कु आक्रमण करेगा | इस्कू आप एकदम सांतामन से और ठन्डे दीमक से इस
का सामना करना होगा तब जेक ये दूर हो पायेगा .जान बुज के कन चिंता
और दुःख मैं रेह्नेकलिये पसंद करेगा ?सब लोग चाहते हे की इस प्रकार चिंता और दुःख
से कैसे दूर रहें |लेकिन दूर नहीं हो पनेका अनेक वजा हे .जिसकी वाजासे इन्सान इस
प्रकार दुःख और चिंता मैं दुबे रहते हैं |
दुःख और चिंता का
प्रमुख वजा ये हे की हम उसके बारे मैं जरुरसोचना होता हे .जिसकी वाजेसे और चिंता
बढ्ने लगता हे |केबल चिंता कु दूर करनेकेलिए सोचो गे तो और भी चिंता बढ़नेलगेगा
आप लोग चिंता कुयन
कृते हे ,चिंता का आबस्यक क्यूँ होता हे ? कोई दर के वाजेसे और कोई रोग ,और हो
सकता हे मत के वाजेसे आप चिंता करते हे |अगर इनमें से कोई होगा तो आप ए सब कु आपना
दिमाक से निकाल देना चाइये,ए सब कु पीछे धकेल देना होगा आप कु | लेकिन एसा नहीं
होगा ये एक एशिबीमारी हे इस कु आप जितना बहार निकाल ने की कोसिस करोगे आप कु उतना
ही याद दिलाता रहेगा | जेसे की एक कहाबत हे जो चीज कु मनसे दूर करना चाहेंगे ,वो
चीज आपकू बार बार याद दिलाता रहेगा | तो चिंता कु दूर करनेकेलिये बार बार कोसिस
नेहीकरना हे आप कु ? उसकू सांता मन और ठंडे दीमक से उसका सामना करना होगा
पहले देखना होगा की
चिंता का कारणक्या हे ?वो कारणकु पहले नस्ट करदेना होगा |अगर आर्थिक परिस्थिति हे
तो उस का profit के बारे में सोच न होगा |
दुसरका मत से दुःख होना :...
कोई अगर मत का सिकर
होजता हे तो उस के बारे मे सोच के चिंता
ओर दुःख करके खुद का सरीर कु
तक्लिप देते हो फिर दीमक भी कम जोर होजत हे |पुराणिक ग्रन्थ का कथानुसार किसिना
किसी कु एक दिन मरना ही हे .तो मत के बारे में सोच के डरना नही चाहिए . किसी का मत
से इतना दुःख और चिनता करना नहीं चाहिए
.ताकि खुद का सरीर बीमार हो | पुराने ग्रन्थ मे बिसयास हे कि आत्मा कभी मरता नहीं
हे वो एक सरीर छोड़ नेके बाद दूसरा जन्म लेताहे .जिबात्मा अमर हे |और एक बात हे
जितना रोनेके बाद भी मरा हुआ इन्सान वापस नहीं आनेवाला हे | तो आप उसके बारे सोच
के खुद कु कुयं जिन्दा लास करते हो ?
*किसेवाजसे खुदका मत से दर :...
खुदका
मत से भी आप घाबराना नहीं चाहिए |जब भगवान
जिजोस कु जब सुलिपे चढ़ाया गया तब भाग्वान जिजोस घाबराया नहीं थे क्यूँ की उस कु पता था उसका मत पक्कि हे
| अनेक ऐसेलोग हे जो फासी पे भी हस हस के आपना जान देचुके हें |वोही ब्यक्ति आपना
मत कु सामने देख कर भी घाबराया नहीं थे | आप तो सीरप सोच्रेहेहो आप का मत आभी पक्की नहीं हे .वेसा नहीं हे की
आप मर जाओगे ,जो आप सोच्रेहेहो हो वो भी निश्चित नहीं हे ,ये आप का जरुर संदेह भी
होसाकता हे तो आप चिंता क्यूँ करते हो ?ऐसे परिस्थित में कोई दोस्त आर बिद्वान
ब्यक्ति से बात भी करसाकते हे |
·
अगर आप
बेरोजगार हे
आप बेरोजगार हे कोई काम नहीं मिल्रराहाहे
, तब भी आप कु किसी प्रकार का चिंता कनेका जरुरत नहीं हे |क्यूँ की नोकरी और
राजगार चिंता करने से नहीं मिलने वाला हे | आप कु आपके बिस्वास रखना होगा ,आप जे
आपना आत्मा बिस्वास कु नेहिंखोना चाहिए , हमेसा राजग का नोकरी का तलाश में रहेना
होगा |देखिये गा सब ठीक होजायेगा |
·
कास्ट
और आपना चिंता कु दुस्रोके के साथ बांटीये :..
आप आपना चिंता और कास्ट कु छुपा के नही
रखना चाहिए ,आपना रिस्तेदारों और दोस्त के साथ बाँट लीजिये , होसके उनका दिया हुवा
साल्ला होसके आप का कास्ट और दुःख कु कम करदे | बाँटने से दुःख हाल्का होता हे |
उनका प्रेरणा से होसके आप कु सही रास्ता मेले ? उनका दिया हुवा एक बिचार होसाके आप को
सही रास्ता में लेजासाकता हे .
·
इच्छा
सक्ती:....
जितना भी दुःख और चिंता रहनेके वाबजूद भी
आप के अन्दर का इच्छा सकती कु कम नही हने देना हे आप कु .आप ए मन में जितना जादा
इच्छा सकती होगा उतना ही जल्दी चिंता आप से दूर जायेगा |
·
हिम्मत
हिम्मत के सामने चिंता और कास्ट टिक नहीं
पायेगा | क्यूँ की एक हिम्मत वाला मुस्किल से भी मुस्किल काम कु करने का प्रयास रखता हे |तो ऐसे ब्यक्ति के
सामने दुःख और चिंता जेसी बीमारी इनका कुछ नहीं बिगड़ पायेगा .वोही ब्यक्ति ही सब
चिंता कु पार करके आगे जापायेगा |
· संतु स्ट
रहो :..
भगवान आप कु इतना सुन्दर सरीर दिया हे
,सरीर का सब अंग सही सलामत हे ,आप बहत बड़े बड़े कम आसानीसे कर पाओगे .आप के अन्दर
सकती हे सहस हे सबकुछ हे . सी के बाद भी आप क्यूँ असंतुस्ट हे ? अगर किसी चीज का
कमी हे उस कु पूरण करनेका प्रयास कीजिये | जितना हे उसकेलिए भगवान कु धन्यवाब
दीजिये | संतोस ही आप कु सही दिसा दिखायेगा | खुद खुसी रह कर दूसरा कु भी खुसी
दीजिये ,, जो बिट गया हे उसकू भूल जाइये ,जो समय बिट गया हे ,जो संकट बित्गेया हे
,उस कु याद कर के रोने की वाजे सब भुला कर खुसी से रहिये
क्यूँ की उस कु याद कर के कोई फिदा नही
होने वालाहे
(धन्यवाद)

